लम्बी खामोशी के बाद
एक दिन जानी-पहचानी आवाज़
कानों में गूंजी —
"फिर से शुरुआत करें सुख-दुख साझा करने की"
तीर सी सिहरन
समूचे वजूद को सिहरा गई
कुछ देर की चुप्पी
और फिर …
अन्तस् से एक आवाज उभरी
ऐसा है -
“वक्त गुजर गया”
अब भी बहुत काम बाकी हैं जो कभी
हमारे साझी थे
कुछ मेरे और कुछ तुम्हारे
देखो…,
मेरे पास काम बहुत हैं
और तुम्हारे पास फुर्सत बहुत
मेरी मानो तो ..,,
खाली वक्त में थोड़ा
आत्ममंथन करना
अगले जन्म में मेरे और तुम्हारे काम
ईमानदारी से
बराबर -बराबर रखना
अगर ऊपर वाले की मेहर हुई तो
एक बार और सही—
फिर से शुरुआत कर ही लेंगे
अपने सुख-दुःख
साझा करने की
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