लम्बी खामोशी के बाद
एक दिन जानी-पहचानी आवाज़
कानों में गूंजी —
"फिर से शुरुआत करें सुख-दुख साझा करने की"
तीर सी सिहरन
समूचे वजूद को सिहरा गई
कुछ देर की चुप्पी
और फिर …
अन्तस् से एक आवाज उभरी
ऐसा है -
“वक्त गुजर गया”
अब भी बहुत काम बाकी हैं जो कभी
हमारे साझी थे
कुछ मेरे और कुछ तुम्हारे
देखो…,
मेरे पास काम बहुत हैं
और तुम्हारे पास फुर्सत बहुत
मेरी मानो तो ..,,
खाली वक्त में थोड़ा
आत्ममंथन करना
अगले जन्म में मेरे और तुम्हारे काम
ईमानदारी से
बराबर -बराबर रखना
अगर ऊपर वाले की मेहर हुई तो
एक बार और सही—
फिर से शुरुआत कर ही लेंगे
अपने सुख-दुःख
साझा करने की
***
दिल को छू गई आपकी बात
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार जितेन्द्र जी !
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर सोमवार 20 जुलाई 2026 को लिंक की गयी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
पांच लिंकों का आनन्द में रचना सम्मिलित करने हेतु सादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार आदरणीय रवीन्द्र भाई जी !
हटाएंसुख दुख साझा कर ले तो जीवन आसान लगने लगे
जवाब देंहटाएंबस साझीदार अपना सा हो....
लाजवाब सृजन।
सादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार सुधा जी !
हटाएंसुंदर सृजन
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार सर !
हटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार हरीश जी !
हटाएंअगले जन्म की किसने देखी है, सयाने कहा गये हैं, यदि इसी जन्म में हिसाब-किताब पूरा हो जाये तो हर क़ीमत पर कर लेना चाहिए, वैसे रचना अच्छी है
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार अनीता जी !
हटाएंवाह!सखी मीना जी ,बहुत सुंदर सृजन । सही कहा आपने ,काम ईमानदारी से बराबर रखना ,अऊले जनम में ही सही ।
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार सखी शुभा जी !
हटाएंबहुत बढ़िया
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार सर !
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