मौन में..,
शब्दों का अभाव नहीं
अर्थों की पराकाष्ठा
छिपी होती है ।
मौन..,
आवरणों के पार जाकर
उन अनकहे इतिहासों को लिखता है,
जिन्हें शब्द कभी कह नहीं पाते ।
कभी-कभी..,
मौन के साथ दृष्टि अपनी नहीं
अर्जुन की सी लगती है
स्थिर, एकाग्र और अडिग ।
जहाँ लक्ष्य..,
सिर्फ़ लक्ष्य नहीं रहता,
धीरे-धीरे
साधना का पर्याय बन जाता है ।
और तब..,
मौन बोलता नही अपितु हृदय पर
लिख देता है अमिट सत्य ।
जिसे सुनने के लिए
कानों की नहीं,
अन्तरात्मा की आवश्यकता होती हैं ।
क्योंकि ..,
कुछ आवाज़ें शब्दों में नहीं,
मौन में ही गूँजती हैं ।
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वाह्ह क्या सुंदर लिखा आपने दी।
जवाब देंहटाएंमौन हृदय पर ऐसा अमिट सत्य लिखता है जिसे बाहरी कानों से नहीं, बल्कि केवल अंतरात्मा से ही सुना और समझा जा सकता है।आत्मा की सबसे मुखर और प्रभावशाली आवाज़ है मौन।
बेहद सुंदर सारगर्भित अभिव्यक्ति दी।
सादर प्रणाम।
सस्नेह।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २ अक्टूबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
आपकी स्नेहसिक्त सारगर्भित सराहना से लेखनी को मान मिला , हृदय की असीम गहराई हार्दिक आभार श्वेता जी ! पाँच लिंकों का आनन्द में सृजन सम्मिलित करने हेतु हार्दिक आभार सहित धन्यवाद । सस्नेह…,।
जवाब देंहटाएंवाह! सखी मीना जी ,मौन की भाषा को बहुत सुंदर शब्दों से सजाया है !
जवाब देंहटाएंआपकी स्नेहसिक्त सराहना से सृजन को मान मिला सखी शुभा जी ! हार्दिक आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद ।
हटाएंवाह
जवाब देंहटाएंअनमोल सराहना हेतु हृदय से असीम आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद सर !
हटाएंकुछ आवाज़ें शब्दों में नहीं,
जवाब देंहटाएंमौन में ही गूँजती हैं
और फिर शायद इन्हे सुनने के लिये और सुनने के बाद भी मौन होना लाजिमी है
अनमोल सराहना हेतु हृदय से असीम आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद सर !
जवाब देंहटाएंमौन का सुंदर स्वर।
जवाब देंहटाएंअनमोल सराहना हेतु हृदय से असीम आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद विश्वमोहन जी !
हटाएंअनुपम सृजन
जवाब देंहटाएंअनमोल सराहना हेतु हृदय से असीम आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद अनुज मनोज जी !
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