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बुधवार, 11 मार्च 2015
"बचपन"
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बचपन अपने आप मे एक सम्पूर्ण जीवन है. अनोखी कल्पनाएँ-बड़े होकर दुनिया का सब से बड़ा इन्सान बनने का सपना,ऐसे संसार की कल्पना जहाँ सारी कायनात...
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मंगलवार, 3 मार्च 2015
"उड़ान"
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उसे भी हक दो वह भी उडना चाहती है, उसकी परवाजें भी तुम्हारी तरह. आसमान को छूना चाहती है. क्यों अनचाहे झपट्टे से उसके हौसले को तो...
13 टिप्पणियां:
शनिवार, 28 फ़रवरी 2015
"दीवारें"
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कभी कहीं पढा था दीवारें मौन होती हैं.बचपन से आज तक सुनती आयी हूँ दीवारों के कान होते हैं.मेरा मन दीवारों के बारे मे कुछ और ही सोचता है. ...
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