मंथन
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सोमवार, 1 सितंबर 2025
“सीमाएँ”
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बहुत सारे किन्तु-परन्तुओं के सानिध्य में नैसर्गिक विकास अवरूद्ध हो जाया करता है वैचारिक दृष्टिकोण में अनावश्यक हस्तक्षेप चिंतन के...
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शनिवार, 9 अगस्त 2025
“त्रिवेणी”
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औद्योगीकरण, शहरीकरण विकास के मानक हैं.., जंगल भी हरित नहीं ईंट -पत्थरों के बनते जा रहे है यह सब देख कुदरत भी मौन न रह कर मुखरित होना सीख ग...
12 टिप्पणियां:
सोमवार, 21 जुलाई 2025
“सफ़र”
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सुख दुख का साझी समय -घट परछाई सा जीवन में चलता रहा मेरे साथ समय के साथ पीछे रह गईं स्वाभाविक प्रवृतियाँ.., अंक में जुड़ते गए मौन और धैर...
18 टिप्पणियां:
शनिवार, 12 जुलाई 2025
“परिवर्तन”
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स्वयं की खोज का सफ़र अकेले ही तय करता है इन्सान अपने अंतस् में उतर कर पहचान पाते हैं हम अनुभूत जीवन का सच बाहर-भीतर,पास-दूर ...
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गुरुवार, 3 जुलाई 2025
पत्तियाँ चिनार की (अंतस् की चेतना)
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बिखरी कड़ियों को समेटने की श्रृंखला में पत्तियाँ चिनार की (अंतस् की चेतना) मेरा तीसरा पद्य-संग्रह ,जिसमें सौ-सौ की संख्या में क्षणिकाएँ,त्...
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शनिवार, 14 जून 2025
“त्रिवेणी”
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मंजिल की खोज की धुन में निकल पड़ा सफ़र पर ज़िद्दी मन इतना निकला आगे कि अब खुद की तलाश में है । ***
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बुधवार, 14 मई 2025
“स्मृति-मंजूषा”
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आज की पोस्ट मेरे लिए कई मायनों में विशेष है औपचारिकताओं से हट कर अपनी बात रखने के लिए, अपनी कल्पना के यथार्थ रूप “स्मृति-मंजूषा” से आप सभ...
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