मन का ऑंगन तो सचमुच बहुत अनूठा है। गहन भाव लिए,कम शब्दों में संपूर्ण सार व्यक्त करती सुंदर अभिव्यक्ति दी। सादर। ------- जी नमस्ते, आपकी लिखी रचना मंगलवार ४ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है पांच लिंकों का आनंद पर... आप भी सादर आमंत्रित हैं। सादर धन्यवाद।
आपने सच ही कहा मीना जी
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार जितेन्द्र जी !
हटाएंमन का ऑंगन तो सचमुच बहुत अनूठा है।
जवाब देंहटाएंगहन भाव लिए,कम शब्दों में संपूर्ण सार व्यक्त करती सुंदर अभिव्यक्ति दी।
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ४ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
स्नेहिल नमस्कार सहित हार्दिक आभार श्वेता जी ! पांच लिंकों का आनन्द में ‘संवाद’ को सम्मिलित करने के लिए असीम आभार ।
हटाएंसचमुच मन का आँगन बड़ा विचित्र है।
जवाब देंहटाएंचिंतनपरक एवं लाजवाब सृजन ।
स्नेहिल नमस्कार सहित हार्दिक आभार सुधा जी !
हटाएंमन के आँगन को कौन समझ पाया भला
जवाब देंहटाएंसुन्दर रचना
सादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार वर्मा जी !
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार सर !
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार हरीश जी !
हटाएंबेहतरीन
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार मनोज जी !
जवाब देंहटाएंजब मन का आँगन इतना अनूठा है तो भला घर कितना सुंदर होगा, तभी तो कहते हैं- चल ख़ुसरो घर आपने
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार एवं स्वागत अनीता जी !
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