जब पछुआ खेतों की
मेड़ों से ठंडी खबर लेकर आती
तो देह ही नहीं,
मन भी सिहर उठता ।
बरखा की पहली बूँद
कच्चे आँगन पर गिरने के साथ
मिट्टी से उठती सोंधी गंध और
हँसी के अंकुर..,
बौछार बन बरसने लगते ।
बारिशें अब भी हैं,
मगर…
अब घरों में..,
खिड़कियों पर शीशे हैं
दरवाज़ों पर कुंडियाँ हैं
और घरों के भीतर
मौसम से बेख़बर जीवन है
***
अच्छी कविता है मीना जी आपकी। कहीं शीर्षक में कोई त्रुटि तो नहीं हो गई।
जवाब देंहटाएंपोस्ट करने में कहीं पंक्तियों की सेटिंग सही नहीं हो रही थी । पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया देखकर हार्दिक प्रसन्नता हुई ।शायद अब आपको शीर्षक सार्थक लगे । उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आ. जितेंद्र जी ।
जवाब देंहटाएंवाह्ह दी कम शब्दों में कितनी गहरी बात लिख दिया आपने
जवाब देंहटाएंप्रकृति की हर श्वास मनुष्य का जीवन है। परंतु
बदलते दौर ख़ुद को आधुनिक चकाचौंध के बाड़ में कैद कर प्रकृति की सुंदरता,सोंधी खुशबू और जादुई स्पर्श से अनजान होते जा रहे है।
सस्नेह
सादर।
------
नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार ३ नवंबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
आपकी सुन्दर सारगर्भित प्रतिक्रिया लेखनी में सदैव ऊर्जा का संचार करती है ।आपकी स्नेहिल उपस्थिति के लिए
जवाब देंहटाएंअसीम आभार श्वेता जी ! “पाँच लिंकों का आनन्द” के आमन्त्रण के लिए भी हृदय से आभार । सस्नेह..॥
बहुत सुंदर वर्णन
जवाब देंहटाएंहृदय तल से हार्दिक आभार आ. रेनूप्रिया जी !
हटाएंसत्य कहा है
जवाब देंहटाएंहृदय तल से हार्दिक आभार आ. ओंकार सिंह जी!
हटाएंअब तो वैसे आंगन भी नहीं गये। बचपन में कागज के नाव बनाकर तैराया जाता था 😅
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर सृजन 🌸❤️
हृदय तल से हार्दिक आभार आ. शिवम कुमार जी!
जवाब देंहटाएंगर्मी से बचने के लिए एसी, ठंड से बचने के लिए हीटर और वर्षा से बचने के लिए दड़बों जैसे घर, मानव प्रकृति से कितना दूर होता जा रहा है, शायद इसीलिए आत्मीयता और सहज प्रेम से भी, वह भी तो कुदरती ही होते हैं
जवाब देंहटाएंसुन्दर सार्थक विचाराभिव्यक्ति ने सृजन का मान बढ़ाया । हार्दिक आभार सहित बहुत-बहुत धन्यवाद अनीता जी !
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंहृदय तल से हार्दिक आभार सर !
हटाएंबदलते परिवेश और जीवन का यथार्थ , अति सुंदर
जवाब देंहटाएंहृदय तल से हार्दिक आभार आ. एस.के.लोहिया जी !
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंहृदय तल से हार्दिक आभार सर !
हटाएं