गुम है एक औरत
इससे पहले कि ..,
थाह लूं उसके मन की
हवा के झोंके सी..,
वह निकल जाती है
मेरी पहुँच से परे ।
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भावनाएँ सोते सी
बहती बहती रूक जाती हैं
यकबयक..
बड़े ताकतवर हैं
अनचीन्हे अवरोध के पुल ।
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झील के तल का अंधकार
खींच रहा है नाव को अपनी ओर
लेकिन वह भी..,
ज़िद्दी लड़की सी ,लहरों से लड़ती
अपनी ही धुन में मगन
चली जा रही है..,
इस किनारे से उस किनारे ।
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