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बुधवार, 18 मई 2022

“त्रिवेणी”



बालकनी में नहाए धोये गमलों में खिले गुलाब 

रेलिंग से बाहर हुलस हुलस कर झांक रहे हैं और ..,


उस पार मैदान में गुलमोहर अपने साथियों संग इठला रहे हैं ॥

🍁


मन सिमट रहा है खोल में कछुए जैसा

और उसी खोल में अभिव्यक्ति भी ..,


पर ग़ज़ब यह कि शोर बहुत करता है ॥

🍁


किर्चें चुभ गई काँच सरीखी

और लहू की बूँद भी नहीं छलकी.., 


गंगा-जमुना हैं कि बस.., बह निकली ॥


🍁



29 टिप्‍पणियां:

  1. एक से बढ़ कर एक त्रिवेणी । अंतिम वाली तो आर पार हो गयी ।।

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  2. आपकी सराहना पा कर लेखनी को मान मिला । हृदयतल से हार्दिक आभार मैम !

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 19.5.22 को चर्चा मंच पर चर्चा - 4435 में दिया जाएगा| चर्चा मंच पर आपकी उपस्थिति चर्चाकारों का हौसला बढ़ाएगी
    धन्यवाद
    दिलबाग

    जवाब देंहटाएं
  4. सृजन को चर्चा मंच की चर्चा में सम्मिलित करने के लिए सादर आभार आ. दिलबागसिंह जी ।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह! बेहतरीन सृजन।

    किर्चें चुभ गई काँच सरीखी
    और लहू की बूँद भी नहीं छलकी..,

    गंगा-जमुना हैं कि बस.., बह निकली.. वाह!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार अनीता जी!

      हटाएं
  6. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 19 मई 2022 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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    उत्तर
    1. पाँच लिंकों का आनन्द में मेरे सृजन को सम्मिलित करने के लिए सादर आभार आ. रवीन्द्र सिंह जी ।

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  7. उत्तर
    1. आपकी सराहना पा कर लेखनी को मान मिला । सादर आभार आ.विश्वमोहन जी।

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  8. उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार ज्योति जी।

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  9. बहुत ही सुंदर सार्थक त्रिवेणी।
    बधाई मीना जी ।

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार जिज्ञासा जी!

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  10. गुलमोहर और उनके साथियों की बात ही निराली है, उन्हें आदत होती है हर मौसम अपने हिसाब से ढल जाने की
    बहुत अच्छी रचना

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार कविता जी!

      हटाएं
  11. बहुत ही सुंदर भावपूर्ण रचना

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार अनुज ।

      हटाएं
  12. अर्थपूर्ण और भावपूर्ण
    त्रिवेणी

    सुंदर सृजन

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी सराहना पा कर लेखनी को मान मिला । सादर आभार आ. ज्योति खरे सर।

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  13. इस त्रिवेणी की धार निराली है। अति सुन्दर अभिव्यक्ति।

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    उत्तर
    1. सृजन को मान प्रदान करती आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभारी हूँ अमृता जी !

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  14. सुंदर भावपूर्ण त्रिवेणियां सभी सार्थक गूढ़ता लिए।
    अप्रतिम सृजन।
    तीसरी त्रिवेणी पर एक क्षणिका।

    दिन भी सूने रातें भी सूनी
    और सूना - सूना दिल का
    जहाँ होता है
    ऐसे में भी महफ़िलें सजती है
    आँखों में अश्कों की ।।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. त्रिवेणियों का सार्थकता प्रदान करती आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया ने सृजन का मान बढ़ाया । आपकी लेखनी से निःसृत
      क्षणिका बेहद मर्मस्पर्शी है ॥हृदयतल से हार्दिक आभार कुसुम जी!

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  15. एकाकी मन की व्यथा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रिय मीना जी।सच में कई बार नवल रूप में सजी प्रकृति भी मन बहलाने में सक्षम नहीं होती।

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    उत्तर
    1. संगीत और गीत एकान्त की देन है । मेरे इस दृष्टिकोण को पोषित करती स्नेहिल प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार प्रिय रेणु जी ! सस्नेह सादर वन्दे !

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  17. Having read your article. I appreciate you are taking the time and the effort for putting this useful information together.

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मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

- "मीना भारद्वाज"