क्षिlतिज पार -
शक्रचाप को देख
रवि मुस्काया ।
हरी दूब में -
तिनके बटोरती
नन्ही गौरैया ।
रिक्त गेह में -
नीम पर चहके
नव जीवन ।
प्यासा पपीहा -
ताके नभ की ओर
भरी धूप में ।
ढलती साँझ -
सागर की गोद में
सोया सूरज ।
***
क्षिlतिज पार -
शक्रचाप को देख
रवि मुस्काया ।
हरी दूब में -
तिनके बटोरती
नन्ही गौरैया ।
रिक्त गेह में -
नीम पर चहके
नव जीवन ।
प्यासा पपीहा -
ताके नभ की ओर
भरी धूप में ।
ढलती साँझ -
सागर की गोद में
सोया सूरज ।
***
रश्मि को देख
आसमान में छिपा
भोर का तारा ।
मोती के जैसी
धूप में चमकती
ओस की बूँद ।
श्वेत वसन
धरती ने पहने
शीत ऋतु में ।
ढलती साँझ
ठिठुरन भगाए
चाय का कप ।
धीमे से बजी
पत्तियाँ मेपल की
सर्द रात में ।
सर्दी की रात
पत्तों के कम्बल में
लिपटा चाँद ।
***
खुला मैदान
बारिश की बूँदों में
वृक्षों का स्नान ।
पावन बेला
हर घर फहरा
तिरंगा प्यारा ।
मन मयूर
“जन गण मन” को
गर्व से गाएं ।
मांओं के लाल
स्वतंत्रता निमित्त
हुए क़ुर्बान ।
राष्ट्र की नींव
निस्पृही बलिदानी
वीरों को नमन ।
आज़ादी पर्व
अमृत महोत्सव
जय भारत ।
***
पावस ऋतु
नीम की डाल पर
निबौरी गुच्छ ।
सावन माह
कानों से बात करे
खेतों में धान ।
भोर उजास
नागवारा झील में
तैरती घास ।
पुराने ख़त
परतों में समेटे
यादों के पुष्प ।
काली घटाएं
गाँव गली में गूँजे
राग मल्हार।
गली का छोर
चंग की थाप पर
झूमते लोग ।
नदी का घाट
पुष्प ,फल, मिष्ठान्न
षष्ठी पर्व में ।
बरसी घटा
आँगन में तैरती
काग़ज़ नाव ।
भोर का तारा
अम्बर में सिमटा
देख लालिमा ।
जब से उगे
कंक्रीट उपवन
लुप्त गौरैया ।
***
🪔
ऋतु हेमन्त~
घर-घर सजती
दीपमालिका ।
🪔
दीपक ज्योति~
तम दूर भगाए
राग द्वेष का ।
🪔
शोभा अपार ~
रंगोली- तोरण से
गृह द्वारों की ।
🪔
पावन पर्व ~
मन मोद मनाएं
हर्षें व गाएं ।
🪔
दीप पर्व की
हार्दिक शुभेच्छाएँ
मित्र वृन्द को ।
🪔
🙏🙏
निर्जन वन~
सूखे पोखर पर
गज समूह ।
*
रेतीले धोरे ~
बाला के सिर पर
खाली गागर ।
*
ज्येष्ठ मध्याह्न~
पदचिह्न छोडती
खेत में वृद्धा ।
*
लू की लहर ~
बरगद के नीचे
दुर्बल गैया ।
*
भूरी सैकत ~
ऊँट की पीठ पर
प्रेमी युगल ।
*
चाँदनी रात~
कालबेलिया नृत्य
मरूभूमि में ।
*
गोधूली बेला~
तुलसी चौरे पर
जलता दीया ।
***
पेड़ों की शाखें ~
शुक वृन्द चोंच में
अनार दाने ।
🔸
कानन पथ~
अहेरी के जाल में
मृग शावक ।
🔸
नदी का तट~
मांझी की झोपड़ी से
मछली गंध ।
🔸
पेड़ की डाल ~
गिलाई के पंजें में
मीठी निबौरी ।
🔸
सर्दी में वर्षा~
इलायची महकी
चाय प्याली में ।
🔸
भोर उजास~
आंगन में बिखरे
निहार कण ।
🔸
सर्दी की धूप~
छत मुंडेर पर
गोरैया जोड़ा ।
🔸
सागर तट~
लहरों को देखता
नव युगल ।
🔸
कानन पथ~
झरने के समीप
गज शावक ।
🔸
झील के पार ~
पनपी शाखों पर
बैया कॉलोनी ।
🔸
शीत मध्याह्न~
लड़की के हाथों में
ऊन-सिलाई ।
🔸
हिमस्खलन~
चट्टान की ओट में
पर्वतारोही ।
🔸
जल प्रपात~
पत्थर से फिसला
युवक पाँव ।
🔸
बर्फानी रात ~
सरहद की रक्षा
फौजी के हाथ ।
***
【गूगल से साभार】
☀️
दिवाली पर्व~
हरे गहन तम
मृतिका दीप ।
☀️
अमा की रात~
जगमग करती
तम मे दीप्ति ।
☀️
कोरोना काल~
दीपक महोत्सव
सादगीपूर्ण ।
☀️
🙏दीपावली महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏