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शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

“शुरुआत”

लम्बी खामोशी के बाद एक दिन 

किसी ने कहा —


"फिर से शुरुआत करें सुख-दुख साझा करने की"


तीर सी सिहरन

समूचे वजूद को सिहरा गई

कुछ देर की चुप्पी 

और फिर …

अन्तस् से एक आवाज उभरी


ऐसा है - “वक्त गुजर गया”

अब भी बहुत काम बाकी हैं 

जो कभी हमारे साझी थे

कुछ मेरे और कुछ तुम्हारे


देखो…,

मेरे पास काम बहुत हैं

और तुम्हारे पास फुर्सत बहुत 


मेरी मानो तो खाली वक्त में

कुछ आत्ममंथन करना 


और फिर अगली बार 

मेरे और तुम्हारे काम ईमानदारी के साथ 

बराबर -बराबर रखना


अगर ऊपर वाले की मेहर हुई तो

 एक बार और सही— 


फिर से शुरुआत कर ही लेंगे

अपने सुख-दुःख

साझा करने की


***