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गुरुवार, 6 फ़रवरी 2020

"सायली छन्द"


कुहूक
कोयल की
गूंजी प्रभाती सी
सूर्योदय के
संग...

नेह
डोर बंधन
सांसों में घुल
हिय बीच
बसा..

अनचीन्हे 
संदली ख्वाब
सीप में मोती
जैसे पनपते
प्रतिपल...

अचल
पाषाण फोड़
वह बह निकली
करने मैदान
उर्वर….

★★★

बुधवार, 25 दिसंबर 2019

"सायली छंद"

Merry Christmas to all of you 🎅

एक प्रयास सायली छंद लिखने का… , भावाभिव्यक्ति के लिए शब्दों का क्रम - 1,2,3,2,1रहेगा ।

(1)

जिन्दगी
तेरे इम्तिहान
कितने अभी बाकी
बावरा मन
पूछे...

(2)

चलो
फिक्र को
फूंक से उड़ाएँ
थोड़ा हँसे
खिलखिलाएँ...

(3)

अंजुरी
भर ख्वाब
मुट्ठी में बन्द
चमकते जुगनुओं
जैसे...

(4) 

स्मृतियों
का सूत
जीवन रुपी चरखा
कातता रहता
अनवरत...

★★★