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सोमवार, 5 अगस्त 2019

"सेदोका"

आस किरण
लिए अपनी आब
सुनहली आशाएँ
सजी दृगों में
बन के हसीं ख्वाब
जगाती नेह राग

मुस्कुराहट
छलकी अनायास 
सूर्य आभा के साथ
निर्विघ्न खुले
मन की देहरी के
सांकल चढ़े द्वार

मन का दीया
मन की देहरी पे
प्रज्वलित हो कर 
कितनी बार
जाकर जलता है
गत के उस पार

34 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 5 अगस्त 2019 को साझा की गई है......... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 6 अगस्त 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सृजन को मान देने के लिए हृदयतल से आभार रविन्द्र जी ।

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  4. बहुत ही सुन्दर सृजन सखी
    सादर

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  5. दिया....गत के उस पार
    ऐसी स्थिति को उचित शब्द अब तक नहीं मिले थे लेकिन अब तो शब्द भी मिले है वो भी उचित लहजे के साथ.

    पधारें कायाकल्प

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    उत्तर
    1. रचना में शब्द-विन्यास आपको अच्छा लगा उसके लिए तहेदिल से आभार ।

      हटाएं
  6. भाव पूर्ण सेदेको मन के गहरे एहसास, छलना है ऊपरी व्यवहार जिनसे स्वयं को भी चलता है इंसान ।
    गहन भाव लिए अप्रतिम सृजन मीना जी ।

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    उत्तर
    1. कृपया सेदोका पढ़ें ।

      हटाएं
    2. हृदय से आभार कुसुम जी आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया के लिए । सस्नेह ..

      हटाएं
  7. बहुत ही सुन्दर रचना सखी सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन के लिए सस्नेह आभार सखी ! सादर...

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  8. उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार शुभा जी ।

      हटाएं
  9. मुस्कुराहट
    छलकी अनायास
    सूर्य आभा के साथ
    निर्विघ्न खुले
    मन की देहरी के
    सांकल चढ़े द्वार
    बहुत ही लाजवाब सृजन...
    वाह!!!

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    उत्तर
    1. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया से रचना को सार्थकता मिली । हार्दिक आभार सुधा जी ।

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  10. आस की किरण का हाथ थामें और मुस्कराहट लिए , मन की देहरी पर आस के दिए की रौशनी से जगमगाते सेदोका प्रिय मीना नी | एक और बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक शुभकामनायें और बधाई |

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    उत्तर
    1. रचना को सार्थकता और प्रवाह देती स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिज हार्दिक आभार रेणु जी । आपकी स्नेहमयी प्रतिक्रिया से लेखन के प्रति उत्साह द्विगुणित हो जाता है। सस्नेह..

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  11. कई सन्दर्भ के साथ अर्थ दे रही है और यही है रचना की सफलता...लाजवाब सृजन...

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    उत्तर
    1. आपकी सराहना भरी प्रतिक्रिया से सृजन को सार्थकता मिली संजय जी । असीम आभार ।

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  12. उत्तर
    1. अनमोल प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार ।

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  13. बहुत ही सुंदर पोस्ट लिखी है आपने रचना के लिए बहुत-बहुत आभार आपका

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्वागत आपका ब्लॉग पर..., आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"