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बुधवार, 14 अगस्त 2019

"रक्षा बंधन"


बचपन से 
मेरे साथ में
हर काम में
हर बात में
मेरी फ़िक्र में
मेरे साथ रहना

भाई ! मुझे
इतना है कहना
मेरे लिए एक
काम करना
दिल में सहेज 
साथ  रखना 
बचपन की उन
यादों का गहना

बाँधू मैं तुझको
रेशम के धागे
मांगू  मैं मन्नत
रब के आगे
खुशियों भरा
हो संसार तेरा
आँचल के अपने
छोर से
मैने बाँध रखा
नेह तेरा

★★★★★
















16 टिप्‍पणियां:

  1. भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मजबूत प्रेम पूर्ण आधार देता है रक्षाबंधन का त्योहार

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    1. हृदय से असीम आभार संजय जी । आपको रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँँ एवं बधाई ।

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 15 अगस्त 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. "पांच लिंकों का आनन्द" में रचना को सम्मिलित करने के लिए बहुत बहुत आभार रविन्द्र जी ।

      हटाएं
  3. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 14/08/2019 की बुलेटिन, "73 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति कोविंद का राष्ट्र को संबोधन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सृजन को ब्लॉग बुलेटिन के संकलन में सम्मिलित करने के लिए बहुत बहुत आभार शिवम् जी ।

      हटाएं
  4. बाँधू मैं तुझको
    रेशम के धागे
    मांगू मैं मन्नत
    रब के आगे
    खुशियों भरा
    हो संसार तेरा
    भाई के लिए बहन के प्रेम को दर्शाती रक्षा बंधन के त्यौहार ककी सार्थकता बताती बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. रचना को सार्थकता देती प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार सुधा जी !सस्नेह..

      हटाएं
  5. एक बहन के लिए भाई का स्नेह प्रकृति का बहुमूल्य उपहार होता है। सुंदर और पवित्र भावों के धागे से बनी राखी तैयार किया है आपने मीना दी।
    बहुत अच्छी रचना।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार श्वेता ।

      हटाएं
  6. बेहतरीन सृजन दी |भाई बहन का पवित्र स्नेह प्रकृति प्रदत सर्वपरी है| स्नेह का एक धागा अंतस्थ में सुकून का संचार करता है अपने पन एहसास हृदय में घोल देता है |
    बहुत ही सुन्दर भाव
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्नेहमयी प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार अनु !

      हटाएं
  7. बाँधू मैं तुझको
    रेशम के धागे
    मांगू मैं मन्नत
    रब के आगे
    खुशियों भरा
    हो संसार तेरा
    आँचल के अपने
    छोर से
    मैने बाँध रखा
    नेह तेरा.... बेहद खूबसूरत रचना प्रिय मीना जी

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत प्यारा सृजन मीना जी, गहरे अहसास लिए, भाई बहन का अनुपम रिश्ता,
    अभिनव आपकी अभिव्यक्ति।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई के लिए तहेदिल से आभार कुसुम जी ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"