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गुरुवार, 4 अगस्त 2022

“हाइकु”


पावस ऋतु 

नीम की डाल पर

निबौरी गुच्छ ।


सावन माह 

कानों से बात करे

खेतों में धान ।


 भोर उजास 

नागवारा झील में

तैरती घास ।


पुराने ख़त

परतों में समेटे

यादों के पुष्प ।


काली घटाएं

गाँव गली में गूँजे

राग मल्हार।


गली का छोर 

चंग की थाप पर

झूमते लोग ।


 नदी का घाट

पुष्प ,फल, मिष्ठान्न 

षष्ठी पर्व में ।

 

बरसी घटा 

आँगन में तैरती

काग़ज़ नाव ।


भोर का तारा 

अम्बर में सिमटा

देख लालिमा ।


जब से उगे

कंक्रीट उपवन

लुप्त गौरैया ।


***