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गुरुवार, 26 अगस्त 2021

"निर्वात"

गर्मजोशी से लबरेज़

 तुम्हारा स्टेटस... 

 पुराने सन्दूक में छिपाये

 उपन्यास जैसा लगा

 मुझे वो भी प्रिय था 

और तुम भी

तुम से 

जुदाई के वक्त

अपने नेह पर

यकीन की खातिर

एक बार कहा था-

तुम ऑक्सीजन हो

हमारे खातिर

हमारी प्राणवायु….

आज तुम्हें देख कर

लगता है 

तुम तो किसी और आंगन में

तुलसी,मनीप्लान्ट, 

पीपल,बरगद

सब कुछ हो…

हम तो बस उस 

पुराने वादे के साथ

निर्वात में जी रहे हैं


***

शनिवार, 21 अगस्त 2021

पहली पहल बरसेंगे बादल...

 पहली पहल बरसेंगे  बादल

 और माटी भी महकेगी 

मैं होऊं चाहे कहीं भी

यह महक मेरी अपनी सी है

मुझे याद बहुत आएँगी


आधा उजला सा चाँद

जब उतरेगा नभ आँगन में

कोहरे में लिपटी कुछ यादें

 बेमतलब सी खाली बातें

मुझे याद बहुत आएँगी


मेरी आदत कुछ कहने की

तेरी आदत चुप रहने की

भरने बोझिल निर्वात 

बन जाती नेह की नींव

एक तुलसी वाली चाय

मुझे याद बहुत आएगी


***

【चित्र:-गूगल से साभार】

रविवार, 15 अगस्त 2021

" स्वन्तत्रता दिवस"


आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।


     शहीदों को याद करें ,

     मान से शीश झुकायें ।।

     फहरायें तिरंगा शान से ,

     गर्व से जन गण मन गायें ।।


     आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।


     सीखें समानता बन्धुता का पाठ ,

     राष्ट्र का मान बढ़ायें ।

     त्यागें राग द्वेष का भाव ,

     कुटुम्ब खुशहाल बनायें ।।


    आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।


     व्यक्तिगत को भूल कर ,

     समष्टिगत को जीवन सार बनायें ।

     करें सब की इच्छा का आदर ,

     सामान्य इच्छा का सिद्धांत अपनायें ।।


     आओ सब मिल कर आज ,स्वन्तत्रता दिवस मनायें ।

---

आप सबको स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई 🙏🙏

【2018 में स्वतन्त्रता दिवस पर पोस्ट  मेरी एक रचना 】

                              

सोमवार, 9 अगस्त 2021

"माँ"

                           



हे गोविंद.. हे कृष्ण मुरारी…

मंदिर की घंटियों सी

कानों मे  गूंजती

मीठी सी आवाज से

खुलती थी नींद..


चाय की भाप की ओट से

 उजला सा चेहरा

यूं लगता जैसे

धीमे से सुलगते

 लोबान के पीछे 

हो कोई मन्दिर की मूरत ...

 

बहुत सी बातें 

चाँद -सितारों की

जीवन के सिद्धांतों की

मेरे अल्हड़पन की

देश-विदेश की

तुम्हारे नेहसिक्त सानिध्य की...


मगर इन सबके बीच 

 बहुत कुछ ऐसा है

जो रह गया अधूरा

उस आधूरेपन की कशिश

 आज भी  देती है खलिश

गाहे-बगाहे…


***














मंगलवार, 3 अगस्त 2021

"सफ़र"




पल-पल के

 हिसाब से

 तय करती  है

अपना सफ़र…

समय ही कहाँ  है

 इसके पास

चोटी या जूड़ा बनाने का...  

बाल कटने के बाद 

 पोनी टेल भी

 अच्छी ही लगती है

खंजन-नयन

 देखने दिखाने की

फुर्सत किसके पास है

'अकॉर्डिंग टू फेस' गॉगल्स

काफी है खूबसूरती में 

चार चाँद की खातिर…

नन्हे गुड्डे या फिर गुड़िया को

छोड़ती हुई 'डे केयर' में

भागती सी

खींच लेती है अपनी

 पोनी का रबरबैंड और

डाल लेती है

 कलाई में कंगन सा...

कंघी की जगह तेजी से 

फिराती बालों में अंगुलियाँ

करती है रोड-क्रॉस

समेटे कंधे के बैग में

 संधान रूपी तीर

अब इतना करने के बाद

भला...

कौन रोक पाएगा इसको 

अर्जुन की मानिंद

करती दरकिनार

बाधाओं को

ये तो चल पड़ी है

भेदने अपना लक्ष्य 


  ***

【चित्र:-गूगल से साभार】