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गुरुवार, 26 अगस्त 2021

"निर्वात"

गर्मजोशी से लबरेज़

 तुम्हारा स्टेटस... 

 पुराने सन्दूक में छिपाये

 उपन्यास जैसा लगा

 मुझे वो भी प्रिय था 

और तुम भी

तुम से 

जुदाई के वक्त

अपने नेह पर

यकीन की खातिर

एक बार कहा था-

तुम ऑक्सीजन हो

हमारे खातिर

हमारी प्राणवायु….

आज तुम्हें देख कर

लगता है 

तुम तो किसी और आंगन में

तुलसी,मनीप्लान्ट, 

पीपल,बरगद

सब कुछ हो…

हम तो बस उस 

पुराने वादे के साथ

निर्वात में जी रहे हैं


***

32 टिप्‍पणियां:


  1. तुम तो किसी और आंगन में
    तुलसी,मनीप्लान्ट,
    पीपल,बरगद
    सब कुछ हो…
    हम तो बस उस
    पुराने वादे के साथ
    निर्वात में जी रहे हैं
    वाह!गज़ब दी 👌
    प्रेम के एहसास में पगी अनमोल अभिव्यक्ति।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना भरी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार अनीता जी !

      हटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 27 अगस्त 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सांध्य दैनिक मुखरित मौन में रचना साझा करने के लिए सादर आभार यशोदा जी ।

      हटाएं
  3. ज़िन्दगी में हम कितने भ्रम पालते हैं । बेहतरीन भावाभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जीवन का यह भी एक रूप है । उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार मैम 🙏

      हटाएं
  4. उत्तर
    1. हृदयस्पर्शी प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार अनुपमा जी।

      हटाएं
  5. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(२८-०८-२०२१) को
    'तुम दुर्वा की मुलायम सी उम्मीद लिख देना'(चर्चा अंक-४१७०)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. चर्चा मंच प्रस्तुति में रचना सम्मिलित करने हेतु हार्दिक आभार अनीता जी।

      हटाएं
  6. वाह,शानदार । इस छोटी सी रचना का सार अंतर्मन को छू गया,बहुत गहन भावाभिव्यक्ति ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी हृदयस्पर्शी प्रतिक्रिया के लिए हृदय से असीम आभार जिज्ञासा जी।

      हटाएं
  7. गर्मजोशी से लबरेज़

    तुम्हारा स्टेटस...

    पुराने सन्दूक में छिपाये

    उपन्यास जैसा लगा

    मुझे वो भी प्रिय था

    और तुम भी

    बहुत ह्रदयस्पर्शी पंक्तियाँ... बहुत बहुत बधाई हो आपको इस अति मार्मिक लेख के लिए

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्वागत आपकी प्रथम प्रतिक्रिया का ...,हृदय से आभार अनमोल प्रतिक्रिया हेतु ।

      हटाएं
  8. बेहद गहन भाव लिए सुंदर अभिव्यक्ति प्रिय दी।

    सस्नेह
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी हृदयस्पर्शी प्रतिक्रिया के लिए हृदय से असीम आभार श्वेता जी!सस्नेह वन्दे!

      हटाएं
  9. बहुत सुंदर रचना, मीना दी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ज्योति जी ।

      हटाएं
  10. गहन भाव लिए लाजवाब भावाभिव्यक्ति

    तुम तो किसी और आंगन में
    तुलसी,मनीप्लान्ट,
    पीपल,बरगद
    सब कुछ हो…
    हम तो बस उस
    पुराने वादे के साथ
    निर्वात में जी रहे हैं।

    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार सुधा जी।

      हटाएं
  11. खूबसूरत रचना...। आनंद आ गया...। वाह...।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार संदीप जी ।

      हटाएं
  12. बहुत सुंदर...रिश्तों की डोर ऐसी ही होती है... कुछ ज्यादा कस कर बंधे होते और कुछ थोड़ा ढीले... ढीले बंधे हुए अक्सर आगे बढ़ जाते हैं और जो कस कर बंधे थे वो बंधे रह जाते हैं..

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा आपने ..आपकी हृदयस्पर्शी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ विकास जी ।

      हटाएं
  13. ओह गज़ब कितने भ्रम में जीए जाते हैं हम और जब यही मोह निद्रा खुलती हैं आँखे मलते रहते हैं ।
    बहुत सुंदर, अभिनव, भावाभिव्यक्ति मीना जी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सत्य कथन कुसुम जी !आपकी हृदयस्पर्शी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ । सस्नेह वन्दे ।

      हटाएं
  14. पर यह निर्वात भी तो प्रेमोपहार ही है जिसे हम स्वीकार करते हैं । अति सुन्दर भाव एवं कथ्य ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु आभारी हूँ अमृता जी ! सस्नेह वन्दे!

      हटाएं
  15. बहुत खूब ...
    ये पेड़, ये पौधे भी तो ऑक्सीजन का ही रूप हैं ...
    साँसों को जीवित जो रखे वाही सब कुछ है ... बहुत भावपूर्ण रचना ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु आभारी हूँ नासवा जी । सादर वन्दे ।

      हटाएं
  16. उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया हेतु सादर आभार 🙏

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"