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शनिवार, 21 अगस्त 2021

पहली पहल बरसेंगे बादल...

 पहली पहल बरसेंगे  बादल

 और माटी भी महकेगी 

मैं होऊं चाहे कहीं भी

यह महक मेरी अपनी सी है

मुझे याद बहुत आएँगी


आधा उजला सा चाँद

जब उतरेगा नभ आँगन में

कोहरे में लिपटी कुछ यादें

 बेमतलब सी खाली बातें

मुझे याद बहुत आएँगी


मेरी आदत कुछ कहने की

तेरी आदत चुप रहने की

भरने बोझिल निर्वात 

बन जाती नेह की नींव

एक तुलसी वाली चाय

मुझे याद बहुत आएगी


***

【चित्र:-गूगल से साभार】

22 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (22-8-21) को "भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के तार"(चर्चा अंक- 4164) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी। आप सभी को रक्षाबंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें
    ------------
    कामिनी सिन्हा

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    उत्तर
    1. चर्चा मंच पर सृजन को चर्चा में सम्मिलित करने हेतु हार्दिक आभार कामिनी जी।

      हटाएं
  2. ये चाय न जाने कितनी यादों को ताज़ा कर देती है ।।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा मैम आपने ...तहेदिल दिल से आभार आपका उत्साहवर्धन करती उपस्थिति हेतु ।

      हटाएं
  3. चुस्की ले लेकर पिया ... यादों को और बादल बरस गया । बहुत ही सुन्दर सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती उपस्थिति हेतु तहेदिल दिल से आभार अमृता जी !

      हटाएं
  4. आधा उजला सा चाँद

    जब उतरेगा नभ आँगन में

    कोहरे में लिपटी कुछ यादें

    बेमतलब सी खाली बातें

    मुझे याद बहुत आएँगी

    यादें याद आने के लिए ही तो होती है मनमोहक याद़ं का गुलदस्ता सी मनभावन अभिव्यक्ति
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती उपस्थिति हेतु तहेदिल दिल से आभार सुधा जी ।

      हटाएं
  5. अच्छी लगी आपकी यह रचना मीना जी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. रचना आपको अच्छी लगी लेखन सफल हुआ । हार्दिक आभार जितेन्द्र जी ।

      हटाएं
  6. एक तुलसी वाली चाय ...
    क्या खूब लिखा है ... कितनी यादें एक चीज़ से जुड़ जाती हैं ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु
      हार्दिक आभार नासवा जी ।

      हटाएं
  7. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

    जवाब देंहटाएं
  8. उत्साहवर्धन करती सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु
    हार्दिक आभार ज्योति जी ।

    जवाब देंहटाएं
  9. प्रकृति के आंगन में चुस्की वाली चाय किसे नहीं भाएगी ।
    सच सखी तुम्हारी याद बहुत आएगी ।।
    .. सुन्दर नायाब सृजन।

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    उत्तर
    1. हृदयस्पर्शी अनपम प्रतिक्रिया के लिए हृदय से असीम आभार प्रिय जिज्ञासा जी।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"