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सोमवार, 13 जुलाई 2020

"हाइकु"

गंगा का तट ~
बम भोले की गूंज
कावड़ यात्रा
🍁
सावन मास~
शिव की आराधना
भक्ति में शक्ति ।
🍁
सांझ की बेला~
वर्षा फुहार संग
गरम चाय ।
🍁
श्रावणी तीज~
नवोढ़ा के हाथों में
मेंहदी रंग ।
🍁
वर्षा फुहार~
तप्त वसुधा पर
ठंडी बयार ।
🍁
काली बदली~
रिमझिम बरसी
माटी महकी ।
🍁
सावन-झड़ी~
बाबुल का आंगन
थाती हिय की ।
🍁

14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत ही सुंदर हाइकु मिट्टी की महक़ लिए आदरणीय मीना दी.
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए स्नेहिल आभार अनुजा ।

      हटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (15-07-2020) को     "बदलेगा परिवेश"   (चर्चा अंक-3763)     पर भी होगी। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बुधवार की प्रस्तुति में सृजन सम्मिलित करने हेतु सादर आभार आदरणीय🙏

      हटाएं
  3. सावन महीने की भीनी-भीनी खुशबु लिए मनभावन रचना मीना जी,सादर नमन

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हाइकु सृजन का मर्म स्पष्ट करती प्रतिक्रिया के लिए सहृदय आभार सहित सादर नमन कामिनी जी ।

      हटाएं
  4. वाह बेहद खूबसूरत हाइकु सखी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन हेतु स्नेहिल आभार सखी ।

      हटाएं
  5. सावन मास पर सभी हायकू बहुत ही लाजवाब
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए सस्नेह आभार सुधा जी ।

      हटाएं
  6. सुंदर हाइकु सृजन ऋतु और मौसम के अनुरूप।
    अभिनव।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया हेतु सहृदय आभार कुसुम जी ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"