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मंगलवार, 21 जुलाई 2020

लघु कविताएं

विरासत में मिले
 मृदुल तेवर..
समय की तपती धूप खा कर 
कंटीले हो गए और .....
स्वभाव का बढ़ता खारापन
 सागर जल जैसा...
 वक्त लगता है समझने में
खारापन इतना बुरा भी नहीं
जितना माना जाता है 
🍁
निरभ्र नील गगन में
 घिर आती हैं रोज घटाएँ...
उमड़-घुमड़ कर अपनी
 गागर उंडेल रीत जाती हैं
 धरा के आंगन पर...
मरकती हो गया 
वसुधा का रंग भी...
और आसमान इन्द्रधनुषी
बस...एक मन का आंगन है 
जिसके छोर से सांझ सी
अबोली उकताहट..
कस कर लिपटी है
जो हटने का नाम नहीं लेती
🍁

14 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (22-07-2020) को     "सावन का उपहार"   (चर्चा अंक-3770)     पर भी होगी। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  
    --

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रविष्टि को चर्चा में सम्मिलित करने हेतु सादर आभार सर ।

      हटाएं
  2. सुंदर दोनों लघु कविताएँ ।..
    मन एकाकी हो जाए तो साँझ क्या हर बेला उकता देती है ... प्राकृति भी उसे कहाँ छेड़ पाती है ।..

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. कविताओं का मर्म स्पष्ट करती प्रतिक्रिया के लिए असीम आभार नासवा जी ।

      हटाएं
  3. वाह!लाजबाब सृजन आदरणीय दी।
    दोनों ही लघुकविताएं बेहतरीन 👌।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से लेखन को सार्थकता मिली. स्नेहिल आभार अनुजा !

      हटाएं
  4. बस...एक मन का आंगन है
    जिसके छोर से सांझ सी
    अबोली उकताहट..
    कस कर लिपटी है
    जो हटने का नाम नहीं लेती
    बहुत ही सुंदर,हृदयस्पर्शी पंक्तियाँ ,सादर नमन मीना जी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहनीय अनमोल प्रतिक्रिया से मनोबल संवर्द्धन हेतु असीम आभार कामिनी जी । सादर नमन ..

      हटाएं
  5. गागर में सागर भरती अभिनव रचनाएं।
    गहन संवेदनाओं का अप्रतिम सृजन।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न अनमोल प्रतिक्रिया से लेखन का मान बढ़ा कुसुम जी ! असीम आभार..,

      हटाएं
  6. उत्तर
    1. अनमोल प्रतिक्रिया से लेखन का मान बढ़ा सर! असीम आभार 🙏

      हटाएं
  7. उम्दा लिखावट ऐसी लाइने बहुत कम पढने के लिए मिलती है धन्यवाद् (सिर्फ आधार और पैनकार्ड से लिजिये तुरंत घर बैठे लोन)

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई और बहुमूल्य सलाह हेतु बहुत बहुत आभार.

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"