साधारण कहलाना मंजूर नही
और असाधारण होना मांगता है
कठिन श्रम साध्य लक्ष्य साधना
चाहिए गर आसमान से पूरा चाँद
तो दोषारोपण करना गलत होगा
वक्त कब थमा किसी की खातिर
उसे पकड़़ने के लिए श्रम करना होगा
लकीरों को छोड़ नव जागरण ला
तू नहीं किसी से कम पहले स्वयं को समझा
छोड़ व्यर्थ प्रलाप , व्यर्थ रोना छोड़ दे
दुनिया उसी की है जो वक्त की धारा मोड़ देपहन चोला कर्मयोग का खुद में परिवर्तन ला
कीमत अपनी खुद समझ फिर औरों को समझा
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