उसने कहा था---
मैं आत्मा हूँ उसकी
मेरे से ही उसकी
सम्पूर्णता है
मैं जीये जा रही हूँ
अपनी अपूर्णता के साथ
ताकि…
मैं उसकी सम्पूर्णता बनी रहूँ
---
बाल्टी भर
धूप ढकी रखी है
एक कोने में…
अंधेरा घिर आए तो
छिड़क लेना…
रोशनी में...
मन का आंगन हँस देगा
---
देख कर भी किसी की
अनदेखी करना
भले ही …
किसी की नजरों में
सभ्यता का दायरा होगा
छलना को तो यह...
अपना कौशल ही लगता है
***