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रविवार, 14 मार्च 2021

"दायरे"

दायरे हैं कुछ

जो बाँध रखे हैं जतन से

अपने आस-पास

उनमें डूब कर 

अपनी अलग सी दुनिया में

जीने का आनंद

गूंगे के गुड़ सरीखा है

जो महसूस तो होता है

मगर..

बयान नही होता

उन दायरों में सेंध

असह्य पीड़ा भरती है

 दिलोदिमाग में

अपने सुकून की खातिर

फिर से एक नई कोशिश 

और..

उम्र का एक कीमती हिस्सा

निकल जाता है

चटके दायरों के

खाँचें भरने में

चिंतन तो यही कहता है-

'सर्वे भवन्तु सुखिनः'

या फिर

'वसुधैव कुटुम्बकम'

ऐसे समय में

सांसारिक व्यवहारिकता

की खातिर याद आती है

'निदा फ़ाज़ली' की एक ग़ज़ल

जो गूंजती है कानों में

'जगजीत सिंह जी'आवाज में

गुड़ की मिठास सी..

"दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है

सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला'


***

32 टिप्‍पणियां:

  1. "दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है

    सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला'

    क्या बात कही है आपने मीना जी,ज्यादा समझदारी भी अच्छी नहीं होती।
    और जहाँ तक बात "दायरे" की है तो उसका बंधन भी जरुरी होता है।
    सीख देती लाज़बाब रचना,सादर नमन आपको

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु हृदयतल से आभार कामिनी जी।

      हटाएं
  2. वाह!बहुत सुंदर सराहनीय सृजन दी।

    सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला।
    मन को छूते भाव।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु हृदयतल से आभार अनीता जी।

      हटाएं
  3. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 14 मार्च 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सांध्य दैनिक मुखरित मौन में रचना साझा करने के लिए सादर आभार यशोदा जी।

      हटाएं
  4. सही कहा है कि नादाँ लोग रिश्ते निबाह लेते हैं . सोच समझ वाले ही हैं जो कुछ ज्यादा समझदार बने रहते हैं . बहुत बार दायरे खींचने भी पड़ जाते हैं , गुड़ की सी मिठास भी चिंतन मनन से आ जाती है . सुन्दर रचना .

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    1. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से असीम आभार मैम ।

      हटाएं
  5. उत्तर
    1. उत्साहवर्धित करती सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु हृदयतल से असीम आभार सर।

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  6. उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु हृदयतल से असीम आभार सर।

      हटाएं
  7. जब तक दायरे हैं तब तक सेंध लगती ही रहेगी, जिस दिन असीम हो जाएगा मन का आकाश, तब कोई पीड़ा नहीं छू पाएगी, तब कोशिश नहीं होगी सुकून भरने की, सुकून छलक-छलक कर बहेगा, और तब घटित होगा, वसुधैव कुटुंबकम स्वत: ही

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    1. निशब्द और मंत्रमुग्ध हूँ आपकी समझाइश भरी प्रतिक्रिया के लिए । हृदयतल से असीम आभार अनीता जी🙏🙏

      हटाएं
  8. "दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है

    सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला'
    बहुत ही सुंदर सीख देती रचना,मीना दी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु हृदयतल से असीम आभार ज्योति जी ।

      हटाएं
  9. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (16-3-21) को "धर्म क्या है मेरी दृष्टि में "(चर्चा अंक-4007) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    --
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. चर्चा मंच के आमन्त्रण के लिए हृदय से आभार कामिनी जी।

      हटाएं
  10. अद्भुत मीना जी ,
    जिंदगी की जोड़ गणित से इतर होती है सच कहा आपने।
    बहुत गहरे एहसास संजोए सुंदर सृजन।

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    उत्तर
    1. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से असीम आभार कुसुम जी ।

      हटाएं
  11. बहुत ही बेहतरीन रचना सखी 👌

    जवाब देंहटाएं
  12. "दो और दो का जोड़ हमेशा चार कहाँ होता है
    सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला'

    आपकी कविता और यह संदेश... कमाल के हैं...
    साधुवाद 🙏

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    उत्तर
    1. आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया से सृजन का मान बढ़ा । हार्दिक आभार वर्षा जी 🙏🌹🙏

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  13. बेहद खूबसूरत रचना,उसमे चार चाँद लगाती हुई निदा फ़ाजली की दो पंक्तियाँ,दोनों ही कमाल के है मीना जी, ढेरों बधाई हो, नमन

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    उत्तर
    1. आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया से सृजन का मान बढ़ा । हार्दिक आभार ज्योति जी🙏🌹🙏

      हटाएं
  14. उन दायरों में सेंध
    असह्य पीड़ा भरती है
    दिलोदिमाग में
    निदा फ़ाजली की गजल की खूबसूरत लाइनों के साथ बहुत ही सुन्दर एहसासों से सजी लाजवाब कृति....
    वाह!!!

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    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया हेतु हृदयतल से आभार सुधा जी।

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  15. सुन्दर एहसासों से सजी लाजवाब गजल

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    उत्तर
    1. निदा फ़ाज़ली जी की ग़ज़ल चार चाँद लग जाते हैं जगजीत सिंह जी आवाज में..वाकई में यह ग़ज़ल बहुत सुन्दर है ।
      हार्दिक आभार अनुज ।

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  16. बहुत खूब ... एक नया दार्शनिक अंदाज़ दिखाई दे रहा है आपका इस रचना में ... जीवन के अनुभव का दस्तावेज़ ऐसे ही इकठ्ठा होते हैं ....

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    उत्तर
    1. जी सत्य कथन!! जीवन अनुभव की शिक्षा सतत सीख देती हैं । आपकी सारगर्भित प्रतिक्रिया से लेखन सार्थक हुआ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"