Copyright

Copyright © 2024 "मंथन"(https://www.shubhrvastravita.com) .All rights reserved.

शनिवार, 18 मई 2024

त्रिवेणी

 कमरे में मैंने करीने के साथ बहुत दिनों से 
सहेज कर रखी हैं तुम्हारी  धरोहरें..,

बस इसके लिए चन्द ख़्वाहिशों के पर कुतरने पड़े ।


🍁


बेहिसाब अनियंत्रित धड़कनें न जाने

कौन सा संदेश देना चाहती हैं…,


तुम्हारे आने का..,या मेरे जाने का ।


🍁


 वक़्त के साथ प्रगाढ़ता दिखाने की धुन में

रिश्ते भी बोनसाई जैसे  लगने लगते हैं ..,


 कांट-छांट के बाद मोटे लेंस के चश्मे की दरकार होगी।


🍁


तुम्हारे नेह की जड़ें गहरी जमी हैं 

 दिल की ज़मीन पर.., 


 बहुत बार खुरचीं मगर दुबारा हरी हो गई ।


🍁


8 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" सोमवार 20 मई 2024 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात सहित हृदय तल से बहुत बहुत आभार आ . यशोदा जी पाँच लिंकों का आनन्द में सृजन को सम्मिलित करने हेतु ।सादर..।

    जवाब देंहटाएं
  3. सृजन को सार्थकता प्रदान करती प्रतिक्रिया के लिए हृदय तल से सादर आभार सर !

    जवाब देंहटाएं
  4. सार्थक सृजन ... तीन पंक्तियों में प्रखरता से कही बात ...

    जवाब देंहटाएं
  5. सृजन को सार्थकता प्रदान करती प्रतिक्रिया के लिए हृदय तल से सादर आभार नासवा जी !

    जवाब देंहटाएं
  6. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हृदय तल हार्दिक आभार ।

    जवाब देंहटाएं

मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

- "मीना भारद्वाज"