मुस्कुराहट लबों पर, सजी रहने दीजिए ।
ग़म की टीस दिल में, दबी रहने दीजिए ।।
छलक उठी हैं ठेस से, अश्रु की कुछ बूंद ।
दृग पटल पर ज़रा सी,नमी रहने दीजिए
राय हो न पाए अगर ,कहीं पर मुक्कमल।
मिलने-जुलने की रस्म,बनी रहने दीजिए ।।
बिगड़ी हुई बात है,कल संवर भी जाएगी ।
लौ है उम्मीद की बस,जली रहने दीजिए ।।
फूल सी है ज़िंदगी, तो कांटे संग हजार।
कुदरत से बनी लकीर, खिंची रहने दीजिए
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