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सोमवार, 17 जून 2019

"चक्रव्यूह"

स्मृति के
गलियारों में
डूब कर मन
बस डूबता
चला जाता है

कभी रेशम की
उलझी सी
वीथियों में
तो कभी काँच की
किर्चों सी बिखरी
अंतहीन गलियों में

सारहीन
और व्यर्थ सी
बातों के
चक्रव्यूह
में मन
सिमट कर
रह जाता है

भ्रमित सा
चाहता है
भूलभुलैया
से निकलना
मगर चाह कर
भी निकल
नही पाता है
 xxxxx

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर रचना सखी
    सादर स्नेह

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार प्रिय अनीता!! सस्नेह...

      हटाएं
  2. बहुत सुंदर मीना जी विधा कोई भी हो भावाभिव्यक्ति सदा लाजवाब होती है आपकी।
    अप्रतिम रचना ।
    बातों के
    चक्रव्यूह
    में मन
    सिमट कर
    रह जाता है. . .

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी ऊर्जात्मक प्रतिक्रिया मन में उमंग जगाती है..अभिनव लेखन के लिए । सस्नेह आभार कुसुम जी !!

      हटाएं
  3. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 17/06/2019 की बुलेटिन, " नाम में क्या रखा है - ब्लॉग बुलेटिन“ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ब्लॉग बुलेटिन में मेरी रचना सम्मिलित करने के लिए हृदयतल से आभार शिवम् जी ।

      हटाएं
  4. आप तो दी हर लेखन के हर विधा में प्रयोग कर सकती हैं आपकी रचनात्मकता लाज़वाब है...बहुत सुंदर लिखा है..👌

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए हृदय की गहराईयों से सस्नेह आभार श्वेता !!!

      हटाएं
  5. वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  6. स्मृति के गलियारे होते ही ऐसे हैं कि मन चाहकर भी नहीं निकल पाता है। सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  7. मीना दी, चक्रव्यूह से निकलना ही तो जीवन की सबसे बड़ी चुनौती हैं। बहुत सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत खूब . जीवन सचमुच किसी चक्रव्यूह से कम नहीं .

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्वागत आपका..आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से लेखन के प्रति उत्साह में द्विगुणित वृद्धि हुई । सादर आभार..

      हटाएं
  9. स्मृति के
    गलियारों में
    डूब कर मन
    बस डूबता
    चला जाता है
    .....बेहतीन
    अलग अलग विधाओं की लेखन शैली पसंद आई मीना जी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी प्रतिक्रिया सदैव लेखनी को सार्थकता और उत्साह प्रदान करती है । बहुत बहुत आभार संजय जी !

      हटाएं
  10. बहुत खूब ...
    अच्छा है ये अंदाज़ भी ... थोडा और चुटीला हो तो स्वाद आ जाये ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार नासवा जी ! आपका सुझाव ध्यान में रहेगा ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"