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मंगलवार, 5 अप्रैल 2022

“मेघ“

           


अम्बर में घिर आए घन

पछुआ चलती सनन सनन 


मेघों ने छेड़ा जीवन राग

पुष्पों में खिल आए पराग

हर्षित धरती का हर कण

 पछुआ चलती सनन सनन


नाचे मयूर हिय उठे हिलोर

गरज तरज घन हुए विभोर

जड़-जंगम पावस में प्रसन्न 

पछुआ चलती सनन सनन 


वर्षा से जन -जन का मन ख़ुश 

लो ! खिला गगन में इन्द्र धनुष 

अब बाल - वृन्द भी हुआ मगन

पछुआ चलती सनन सनन


***



14 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति,मीना दी।

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ज्योति जी!

      हटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (06-04-2022) को चर्चा मंच       "अट्टहास करता बाजार"    (चर्चा अंक-4392)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'    --

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    उत्तर
    1. कल की चर्चा में सृजन को सम्मिलित करने के लिए सादर आभार आदरणीय शास्त्री जी सर ।

      हटाएं
  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 6 अप्रैल 2022 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
    !

    अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम्

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. रचना को पाँच लिंकों का आनन्द में सम्मिलित करने के लिए सादर आभार पम्मी जी ।

      हटाएं
  4. वर्षा ऋतु का अप्रतिम चित्रण!

    जवाब देंहटाएं
  5. अभी तो मुंबई में बारिश का नामो-निशान नहीं है लेकिन आप की मधुर वर्षा गीत ने तन को भिगो दिया और मन...शीतल हो गया। बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति, सादर नमन मीना जी

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार कामिनी जी । सादर सस्नेह नमन !

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  6. वर्षा से जन -जन का मन ख़ुश

    लो ! खिला गगन में इन्द्र धनुष

    अब बाल - वृन्द भी हुआ मगन

    पछुआ चलती सनन सनन... सहज ही बहती भावों की सुंदर अभिव्यक्ति।
    सादर

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार अनीता जी । सादर सस्नेह …,

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  7. वाह!बाल वृंद भी हुआ मगन ...बहुत खूब !सुंदर भावों से सजी रचना ।

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार शुभा जी । सादर सस्नेह नमन !

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"