Copyright

Copyright © 2024 "मंथन"(https://www.shubhrvastravita.com) .All rights reserved.

बुधवार, 28 जून 2023

“सदा सर्वदा”



शीत-घाम की राह में ,

वक़्त का पहिया चला करे ।

 बन के साहस एक दूजे का ,

सदा सर्वदा साथ चले ॥


झंझावती तूफ़ानों  से ,

क्यो हम भला डरा करें ।

ईश नाम की नैया से ,

मझधारों को पार करें ॥

 

कजरारी काली रातों में ,

तारा बन कर जीया करे ।

वेदनाओं को भूल-भाल कर ,

ख़ुशियों वाली राह चले ॥


मौन संसृति में गूंज उठे जब ,

 रस आपूरित राग घनेरे ।

 साथ  हमारा सदा सर्वदा ,

 क्यों व्यथित मन प्राण तेरे ॥


जैसे तीव्र अग्नि  में तप कर ,

सोना खरा बना रहता  है ।

संघर्षों की राह जीत कर ,

मानव सफल हुआ करता है  ॥


***

18 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार (29-06-2023) को    "रब के नेक उसूल"  (चर्चा अंक 4670)  पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

    जवाब देंहटाएं
  2. चर्चा मंच पर सृजन को कल की चर्चा में सम्मिलित करने के लिए लिए आपका हृदयतल से सादर आभार आदरणीय शास्त्री जी सर 🙏

    जवाब देंहटाएं
  3. सफलता ख़ुद सकारात्मकता की दास है.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. अनमोल प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से हार्दिक आभार रोहितास जी !

      हटाएं
  4. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 29 जून 2023 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. पाँच लिंकों का आनन्द में सृजन को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदयतल से सादर आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह जी 🙏

      हटाएं
  5. शुद्घ हिन्दी की खूबसूरत पंक्तियाँ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से असीम आभार नीतीश जी ।

      हटाएं
  6. उत्तर
    1. आपकी मान भरी उपस्थिति से सृजन सार्थक हुआ । हृदयतल से हार्दिक आभार 🙏

      हटाएं
  7. जैसे तीव्र अग्नि में तप कर ,

    सोना खरा बना रहता है ।

    संघर्षों की राह जीत कर ,

    मानव सफल हुआ करता है ॥
    बहुत सुंदर..
    बाकी तो ईश नाम की नैया में सब संकट कट जाते है ।
    लाजवाब सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  8. अनमोल प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से हार्दिक आभार सुधा जी !

    जवाब देंहटाएं
  9. अनमोल प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से हार्दिक आभार नासवा जी !

    जवाब देंहटाएं
  10. विपरीत परिस्थितियों में प्रेरणा और साहस देती अभिव्यक्ति।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सृजन को सार्थक करती अनमोल प्रतिक्रिया के हृदयतल से हार्दिक आभार मीना जी!

      हटाएं
  11. ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत 🙏 एवं सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ।

    जवाब देंहटाएं

मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

- "मीना भारद्वाज"