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गुरुवार, 28 जून 2018

"मुक्तक"

आप अपने मन की सुना कीजिए ।
और सच के मोती चुना कीजिए ।।
क्यों उलझते हैं तेरे मेरे के फेर में ।
बहते दरिया की तरह से बहा कीजिए

हम.मिलते तो कभी कभी हैं ।
मगर लगता दिल से यही है ।।
साथ है हमारा कई जन्मों से ।
सच है ये कोई दिल्लगी नही है ।।

जीने का शऊर आ गया तेरे बिन
तूने भी.सीख लिया जीना  मेरे बिन
जरूरी है आनी दुनियादारी भी
जिन्दगी काटनी मुश्किल इस के बिन

गिरना संभलना , संभल कर चलना
रोज नये हुनर सिखाती जिन्दगी ।
नित नई भूलों से , नित नये  पाठ
समय के साथ सिखाती जिन्दगी ।।
XXXXXXX

18 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २९ जून २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. "पाँच लिंकों का आनन्द" से जुड़ कर सदैव हर्ष की अनुभूति होती है बहुत बहुत आभार श्वेता जी इस सम्मान के लिए ।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत ख़ूब ...
    भूल से पाठ सीखने वाले कभी पीछे नहि मुड़ते ...
    बहुत लाजवाब हैं सभी मुक्तक ..,

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद नासवा जी ।

      हटाएं
  4. लाजवाब मुक्तक....
    क्यों उलझते हैं तेरे मेरे के फेर में ।
    बहते दरिया की तरह से बहा कीजिए
    वाह!!!!

    जवाब देंहटाएं
  5. सभी मुक्तक बहुत उम्दा
    बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  6. उत्तर
    1. बहुत दिनों के बाद आप की "सुन्दर" सी प्रतिक्रिया मिली , तहेदिल से धन्यवाद सुशील जी।

      हटाएं
  7. बहुत ख़ूब... वाह... ख़ूबसूरत रचना आदरणीया👌👌👌

    जवाब देंहटाएं
  8. जीने का शऊर आ गया तेरे बिन
    तूने भी.सीख लिया जीना मेरे बिन
    जरूरी है आनी दुनियादारी भी
    मुश्किल है जिन्दगी काटनी इस के बिन---
    क्या बात है प्रिय मीना जी !!!!!!! सभी मुक्तक जीवन के अलग अलग रंगों को सार्थक अभिव्यक्ति दे रहे हैं | हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें |

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. स्नेहिल सी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु बहुत बहुत आभार रेणु जी ।

      हटाएं
  9. ऐ ज़िन्दगी हमने भी तेरे इशारे पे जीना सीख लिया, तूने चलाया और हमने चलना सीख लिया.....बेहद उम्दा मीना जी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभारी हूँ संजय जी इतनी सुन्दर सी हौसला अफजाई के लिए ।

      हटाएं


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- "मीना भारद्वाज"