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बुधवार, 20 जून 2018

एक दिन” (हाइकु)

खिल जाते हैं
कमलिनी के फूल
भोर के साथ

अपने आप
सिमटी पंखुडियां
सांझ के साथ

रंग बिरंगी
मीन क्रीड़ा करतीं
लगती भली

ताल किनारे
गुजरे कुछ पल
सांझ सकारे

विश्रांति पल
कुदरत के संग
देते उमंग


XXXXXXX

12 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २२ जून २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  2. अपने आप
    सिमटी पंखुडियां
    सांझ के साथ
    मीना जी बेहद उम्दा नाज़ुक ख़्यालों की ख़ूबसूरती से सजे हाइकु !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद संजय जी ।

      हटाएं
  3. वाह!!बहुत खूबसूरत हाइकु मीना जी ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही लाजवाब हाइकू हैं सभी ...

    जवाब देंहटाएं
  5. तहेदिल से धन्यवाद नासवा जी ।

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"