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शनिवार, 18 सितंबर 2021

"चाँद"

                    

 कभी गाढ़ी नहीं छनी

इन आँखों की नींद से

बहाना होता है 

इनके पास जागने का

कभी थकान का 

तो कभी काम का

खुली छत पर..

तब भी तुम आया करते थे

हॉस्टल के अनुशासित

 वार्डन सरीखे

और आज भी..

बिलकुल नहीं बदले तुम

मगर वक्त के साथ

कितना बदल गई मैं


***



27 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 19 सितम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. "पांच लिंकों का आनन्द" में रचना साझा करने के लिए सादर आभार दिग्विजय सर ।

    जवाब देंहटाएं
  3. अनछुआ चाँद की अनछुई दास्तान । कोमलता से छुती हुई ... उफ़!

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    1. आपकी हृदयस्पर्शी प्रतिक्रिया से लेखनी का मान बढ़ा।हार्दिक आभार अमृता जी ।

      हटाएं
  4. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (19-9-21) को "खेतों में झुकी हैं डालियाँ" (चर्चा अंक-4192) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
    ------------
    कामिनी सिन्हा


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    उत्तर
    1. चर्चा मंच पर मेरे सृजन को सम्मिलित करने हेतु हार्दिक आभार कामिनी जी ।

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  5. चांद से सुंदर विमर्श, मन को स्पर्श करती रचना ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार जिज्ञासा जी।

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  6. ये चाँद से हुई गुफ़्तगू और स्वयं में बदलाव की दास्तान ।
    बहुत अपनी सी लगी । 👌👌👌

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी हृदयस्पर्शी प्रतिक्रिया से लेखनी का मान बढ़ा।हार्दिक आभार मैम 🙏

      हटाएं
  7. बहुत ही प्यारी रचना आदरणीय मैम

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार मनीषा जी ।

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  8. उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार भारती जी ।

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  9. उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार दीपक कुमार जी ।

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  10. यादें ! कुछ हक्कित कुछ कलपनाऐं –
    जिन्‍दगी चाहें जितनी भी पुरानी हो जाऐं
    ये हमेशा नई सी रहती है।

    नन्हीं सी पर भाव से ओतपोत रचना । अति सुंदर !

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार ।

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  11. सच में तब से आज तक चाँद को देखते हुए कितने ही भाव पले हैं मन में ...कुछ नये बने तो पुराने मिटे...पर चाँद वहीं और वैसा ही...
    बहुत ही हृदयस्पर्शी भावपूर्ण कृति।
    वाह!!!

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    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार सुधा जी!

      हटाएं
  12. सुंदरता से मन के भावों को स्पर्श करती रचना...!!

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"