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मंगलवार, 15 जनवरी 2019

“छुवन”(हाइकु)

शरद ऋतु
छुवन तुहिन की
सिहरन सी
वसन्तोत्सव
छुवन बयार की
लागे भली सी

ऋतु पावस
छुवन फुहार की
मुदित धरा

जननी तेरी
छुवन ममता की
पूर्णता मेरी


नेह के नाते
छुवन निजत्व की
मन को भाये


ओ मातृभूमि !
छुवन गौरव की
तुझ से आए

XXXXX

20 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत रचना। बहुत-बहुत बधाई आदरणीय मीना जी।

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    1. हौसला अफजाई के लिए हृदयतल से आभार पुरुषोत्तम जी ।

      हटाएं
  2. सुन्दर हाइकु रचनाएँ लिखी है सखी
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. शरद वसंत से होते हुए मात्री भूमि के गौरव में रचे सुन्दर हाइकू हैं सभी ...
    लाजवाब ....

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    उत्तर
    1. आपकी प्रतिक्रिया से रचना को सार्थकता मिली , बहुत बहुत आभार नासवा जी ।

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  4. आई बासंती बयार सौलह श्रृंगार किए फिर,ऋतु वसंत महकती आई।
    वसंत के आगमन से पहले ही बेहद खूबसूरत हाइकु मीना जी।

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    उत्तर
    1. संजय जी ऋतु वसन्त पर काव्यात्मक प्रतिक्रिया..., हाइकु रचना मे लेखनी को सार्थकता मिली । हृदयतल से आभार ।

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  5. हायकू लेखन में आपका कोई सानी नहीं मीना जी!
    बहुत ही लाजवाब हायकू ....

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    उत्तर
    1. आपके अनमोल वचनों से अभिभूत हूँ सुधा जी !! हृदयतल से आभार आपका !!

      हटाएं
  6. अक्सर लेखक अपनी पुस्तकों को बज़ट के अभाव में प्रकाशित नहीं करा पाते है। कई बार प्रकाशक की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाते है। जिस कारण उनकी पांडुलिपी अप्रकाशित ही रह जाती है। ऐसी कई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हम आपके लिए लाएं है स्पेशल स्वयं प्रकाशन योजना। इस योजना को इस प्रकार तैयार किया गया है कि लेखक पर आर्थिक बोझ न पड़े और साथ ही लेखक को उचित रॉयल्टी भी मिले। हमारा प्रयास है कि हम लेखकों का अधिक से अधिक सहयोग करें।

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  7. जानकारी के लिये सादर आभार प्राची डिजिटल पब्लिकेशन !

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“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"