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शुक्रवार, 27 मार्च 2020

"आह्वान"

चाँद -सितारे करते बातें ,
रात भी बहुत उदास है ।
थका हुआ मन बैठ ये सोचे ,
कितनी निकृष्ट बात है ।।

ऐसी भी क्या भूख ,
कि कुछ भी खा गया कोई ।
किसी एक की मूर्खता पर ,
सम्पूर्ण मनु सृष्टि रोई ।।

अपने मद में डूबा ,
बन गया कोई रक्तबीज ।
बिखरी है पूरी दुनिया में ,
उसके अहंकार की छींट ।।

उस रक्तबीज की बूंदें अब ,
लील रही हैं जिन्दगियाँ ।
राह नजर आती नहीं ,
विषम हो गई परिस्थितियाँ ।।

नवरात्रि पर्व के दिन है ,
तेरा आह्वान करते हैं ।
सिंहवाहिनी ,कष्टहारिणी !
वन्दन बारम्बार करते हैं ।।

तेरे क्षुद्र जीव हैं हम सब ,
माँ हम पर उपकार करो ।
छाये हैं संकट के बादल ,
रक्षा करो माँ कष्ट हरो ।।

★★★★ 

9 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 27 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सांध्य दैनिक में रचना को साझा करने के लिए हृदयतल से सादर आभार यशोदा जी ।

      हटाएं
  2. तेरे क्षुद्र जीव हैं हम सब ,
    माँ हम पर उपकार करो ।
    छाये हैं संकट के बादल ,
    रक्षा करो माँ कष्ट हरो ।।

    अब तो माँ से बस यही प्रार्थना हैं ,बहुत सुंदर मन को द्रवित कर गई आपकी रचना ,सादर नमन मीना जी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ऊर्जावान अनमोल प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से स्नेहिल आभार कामिनी जी ।

      हटाएं
  3. ऐसी भी क्या भूख ,
    कि कुछ भी खा गया कोई ।
    किसी एक की मूर्खता पर ,
    सम्पूर्ण मनु सृष्टि रोई
    बहुत ही मर्मान्तक प्रश्न सखी ! इसी भूख ने सारी दुनिया को एक अप्रत्याशित संकट में डाल दिया है | माँ जगदम्बा सब पर कृपा करें | सुंदर रचना मीना जी , हमेशा की तरह | कल्याणकारी भावों से सजा सृजन | नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई |

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"