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बुधवार, 11 मार्च 2020

"हाइकु"

हिमानी पथ~
सैनिकों की टुकड़ी
कतारबद्ध ।

ऊषा लालिमा~
ब्रह्मपुत्र में जाल
डालता मांझी ।

कानन पथ~
अहेरी के कंधे पे
अन्न व जाल ।

गोधूलि बेला~
निज नीड़ लौटता 
गौरेया जोड़ा

शुभ्र गगन ~
परवाजे भरता
श्वेत कपोत ।

सागर तट~
बचपन की यादें
सीप में मोती  ।

श्रावण मास~
निशिथ में गूंजता
दादुर स्वर ।

★★★★★

20 टिप्‍पणियां:

  1. सटीक सुंदर हाइकु ।
    सुंदर प्राकृतिक बिंब।

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (13-03-2020) को भाईचारा (चर्चा अंक - 3639) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    आँचल पाण्डेय

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. चर्चा मंच पर सृजन को सम्मिलित करने के लिए हार्दिक आभार आँचल जी । सस्नेह...

      हटाएं
  3. बहुत ही सुंदर भावों से सजा हाइकू ,सादर नमन आपको

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक आभार कामिनी जी ...स्नेहिल नमस्कार🙏

      हटाएं
  4. भाव बहते है इन पंक्तियों में
    किसी निर्मल नदिया की तरह।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न ऊर्जावान प्रतिक्रिया से लेखन सफल हुआ रोहित जी । असीम आभार ।

      हटाएं
  5. हार्दिक आभार विकास जी ।

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह!!!
    लाजवाब हायकु
    एक से बढ़कर एक...।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ऊर्जावान प्रतिक्रिया से लेखन को सार्थक मिली सुधा जी हार्दिक आभार ।

      हटाएं
  7. वाह ... लाजवाब सटीक ...
    एक चित्र खड़ा करते हैं सभी हाइकू .।।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार नासवा जी ।

      हटाएं
  8. एक से बढ़कर एक सटीक सौन्दर्यभाव का अनुभव कराते सभी हाइकु कमाल के मीना जी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. उत्साहवर्धन करती ऊर्जावान प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार संजय जी ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"