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गुरुवार, 15 फ़रवरी 2024

“क्षणिकाएँ”

तुम्हारी ठहरी सी आवाज सुन

मेरा अन्तस मुस्कुरा दिया -

चलो ! अच्छा  है ..,

तुम्हारे मन की थाह पाकर

मेरी उम्र के कुछ और 

बरसों को उड़ान की ख़ातिर 

पंख मिल गए ।


*


दुनिया देखने के लिए

 मेरे लिए., 

मेरा अपना चश्मा ही ठीक है 

तुम्हारे चश्मे के शीशों के

उस पार..,

मुझे सब कुछ धुंधला सा

नज़र आता है जिसको देख

मेरा मन ..,

बहुत किन्तु-परन्तु करता है 


*

16 टिप्‍पणियां:

  1. तुम्हारी ठहरी सी आवाज सुन

    मेरा अन्तस मुस्कुरा दिया -

    चलो ! अच्छा है ..,

    तुम्हारे मन की थाह पाकर

    मेरी उम्र के कुछ और

    बरसों को उड़ान की ख़ातिर

    पंख मिल गए ।

    बहुत ही सुन्दर भाव अभिव्यक्ति मीना जी 🙏

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन को सार्थकता मिली ।हृदयतल से हार्दिक आभार कामिनी जी ! सादर सस्नेह नमस्कार!

      हटाएं
  2. आहा... मन में उतरती सुंदर अभिव्यक्ति दी।
    सस्नेह प्रणाम।
    ----
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १६ फरवरी २०२४ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन को सार्थकता मिली, हृदयतल से आभार श्वेता जी ! पाँच लिंकों का आनन्द में सृजन को सम्मिलित करने के लिए हृदयतल से आभार । सस्नेह नमस्कार !

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ । हार्दिक आभार सहित सादर नमस्कार जोशी सर !

    जवाब देंहटाएं
  5. दुनिया देखने के लिए
    मेरे लिए.,
    मेरा अपना चश्मा ही ठीक है
    तुम्हारे चश्मे के शीशों के
    उस पार..,
    मुझे सब कुछ धुंधला सा
    नज़र आता है जिसको देख
    मेरा मन ..,
    बहुत किन्तु-परन्तु करता है।
    वाह!!!
    क्या बात...
    हर किसी का अपना नजरिया है
    लाजवाब सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन को सार्थकता मिली ।हृदयतल से हार्दिक आभार सुधा जी ! सादर सस्नेह नमस्कार!

      हटाएं
  6. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ । हार्दिक आभार सहित सादर नमस्कार सर !

    जवाब देंहटाएं
  7. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ । हार्दिक आभार सहित सादर नमस्कार हरीश जी !

    जवाब देंहटाएं
  8. मन की गहराइयों में उतरती सुंदर भावाभिव्यक्ति।

    जवाब देंहटाएं
  9. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ । हार्दिक आभार सहित सादर नमस्कार जिज्ञासा जी !

    जवाब देंहटाएं
  10. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ । हार्दिक आभार सहित सादर नमस्कार !

    जवाब देंहटाएं

मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

- "मीना भारद्वाज"