( 1 )
चिनार के पत्तों से
मुठ्ठी की रेत सा
फिसलता कोहरा
आसमान में …,
छिटपुट तारों के बीच
उदास सा शुक्र तारा
और…
स्थिर पलों में
तिल तिल खर्च होता
आदमी….
(2)
बोझल तेवर लिए
हवाएँ ...
शून्य ताकती
नीरव पगडंडियां...
दिन-रात के सन्नाटे को
भेदती है….
एक चिड़िया की
टिटकार...
बैचेन पखेरु भी
व्याकुल हैं….
खामोश उड़ान की तेजी
जता रही है….
इनको भी चिन्ता है
अपने अपनों की….
★★★★★