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मंगलवार, 11 अक्तूबर 2016

"प्रकृति-2"

मेघों से ढकी वादियाँ
हवाओं में गुनगुनाहट।

भंवरों का गुंजन
फूलों की मुस्कुराहट।

खगों का कलरव
वृक्षों के पत्तों की मरमराहट।

खामोश फिज़ाओं में
जीवन की सुगबुगाहट।

चहुँ ओर फैली है
रोशनी की जगमगाहट।

कहो प्रकृति देवी!
आपके आंगन में आज
किसके आने की है आहट।



XXXXX

2 टिप्‍पणियां:


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"