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शनिवार, 15 अक्तूबर 2016

“प्रकृति-3”

रेतीले धोरों पर ओस की बूँदें
श्वेत मोतियों की चादर सी लगती है ।

मलयानिल के झोंकों से झुकी धान की बालियाँ
नृत्य करती अप्सराओं समान लगती हैं ।

शरद ऋतु में धवल अलंकारों से सजी प्रकृति
माँ सरस्वती सी महान लगती है ।

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- "मीना भारद्वाज"