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रविवार, 2 अप्रैल 2017

"राधा-कृष्ण"(हाइकु)

राधिका संग
झूठी रार मचाई
कृष्ण कन्हाई।

नील गगन
तारों की छाँह तले
नैना भटके।

चाँदनी रात
शबनमी बयार
मौन खटके।

कुछ बोलो ना
अपनेपन संग
मन की बातें।

कदम्ब तले
जमुना तट पर
नेह बरसे।

XXXXX

2 टिप्‍पणियां:


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"