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शुक्रवार, 8 मार्च 2019

" नवगीत "(भुजंगप्रयात छन्द)


चलो आज कोई नया गीत गायें ।
किसी की न माने बहाने बनायें।।

उड़ानेंं पंछी के परों से चुरायें ।
नमी ओस की बादलों से उड़ायें ।।

सजाये सितारे त्रियामा सुहानी ।
हवा भी सुनाती नयी सी कहानी ।।

अनोखी छबीली लिए है रवानी ।
तमन्ना हमारी किसी ने न जानी ।।

कभी चाँदनी है कभी है अंधेरा ।
कहे भोर देखो नया है सवेरा ।।

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14 टिप्‍पणियां:


  1. कभी चाँदनी है कभी है अंधेरा ।
    कहे भोर देखो नया है सवेरा ।।


    सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  2. वाह बहुत सुन्दर मीना जी नई भोर का सुंदर आह्वान करती सुंदर रचना।

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  3. कभी चाँदनी है कभी है अंधेरा ।
    कहे भोर देखो नया है सवेरा ।।
    बहुत सुंदर रचना 👌

    जवाब देंहटाएं
  4. अनोखी छबीली लिए है रवानी ।
    तमन्ना हमारी किसी ने न जानी ।।
    वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर मनभावन गीत...

    जवाब देंहटाएं
  5. मीना जी पहले सोचा की बेहतरीन पंक्तियाँ चुन के तारीफ करू ... मगर पूरी नज़्म ही शानदार है !!

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    उत्तर
    1. सराहनीय अनमोल प्रतिक्रिया के लिए हृदय से आभार से संजय जी ।

      हटाएं
  6. वाह ... बहुत सुन्दर छंद लाजवाब लेखन ...
    हर पंक्ति पूर्ण स्वयं में .. नया सन्देश लिए ... आग्रह है की अगर इस/आगे से भी जो लिखें, छंद की थोड़ी व्याख्या भी कर दें तो कुछ न कुछ नया जानने को मिल जाएगा पढने वालों को ... आभार ...

    जवाब देंहटाएं
  7. आपके उत्साहवर्धक वचनों से छंद रचना को सार्थकता मिली..., अभिभूत हूँ आपकी रचना में रूचि पाकर । आगे से इस तरह के सृजन में परिचय अवश्य रहेगा । भुजंगप्रयात छंद मात्रिक छंदों मेंं अग्रणी है । इसकी हर पंक्ति में यगण की चार बार आवृति होती है । इसका सूत्र---यगण अर्थात यमाता,यमाता, यमाता, यमाता है ।

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  8. बहुत सुंदर रचना, मीना दी।

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"