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शनिवार, 30 मार्च 2019

"उसूल"

चाहे भले लगे या बुरे लगे ,
मेरे उसूल कुछ हैं तो हैं ।
राहें भले ही हो कैसी भी ,
चलना इन पर मुझ को ही है ।
कायम की राय गर समझ बूझ ,
परिणाम मेरे अपने ही हैं ।
फिसल गया कभी पैर कहीं ,
तो टूटन का फिर दुख क्यों है ।
रोने से नही कुछ भी हासिल ,
मेरे सिद्धांत कुछ ऐसे ही  है ।
चल उठ संभल और बढ़ आगे ,
निर्णय ये खुद मेरे  ही है ।

xxxxx

38 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी.......
    आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
    आप की इस रचना का लिंक भी......
    31/03/2019 को......
    पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
    शामिल किया गया है.....
    आप भी इस हलचल में......
    सादर आमंत्रित है......

    अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
    https://www.halchalwith5links.blogspot.com
    धन्यवाद

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    उत्तर
    1. "पांच लिंकों का आनंद" मेरी रचना को साझा करने के निमन्त्रण के लिए सादर आभार कुलदीप जी ।

      हटाएं
  2. गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में
    वो तिफ़्ल क्या गिरेंगे जो. घुटनों के बल चलें.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मन अभिभूत हुआ इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया पा कर 🙏🙏 तहेदिल से शुक्रिया ।

      हटाएं
  3. तहेदिल से आभार रविंद्र जी ।

    जवाब देंहटाएं
  4. रोने से नही कुछ भी हासिल ,
    मेरे सिद्धांत कुछ ऐसे ही है ।
    बहुत खूब...
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत खूब ...
    असूल हैं तो हैं फिर अच्छा बुरा क्या सोचना ... क्या हारना, थक के बैठना ... अच्छी रचना है ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सारगर्भित अनमोल प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार नासवा जी ।

      हटाएं
  6. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 30/03/2019 की बुलेटिन, " सांसद का चुनाव और जेड प्लस सुरक्षा - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ब्लॉग बुलेटिन में मेरी रचना शामिल करने के लिए सादर आभार शिवम् जी ।

      हटाएं
  7. क्या बात है, बहुत खूब। बहुत सही।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई के लिए तहेदिल से आभार विरेन्द्र जी ।

      हटाएं
  8. रोने से नही कुछ भी हासिल ,
    मेरे सिद्धांत कुछ ऐसे ही है ।
    चल उठ संभल और बढ़ आगे ,
    निर्णय ये खुद मेरे ही है ।

    प्रेरित करती हुई पंक्तियाँ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. अमूल्य प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार विकास जी।

      हटाएं
  9. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" l में लिंक की गई है। https://rakeshkirachanay.blogspot.com/2019/04/115.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. "मित्र मंडली" में मेरी रचना साझा करने के लिए सादर आभार राकेश जी ।

      हटाएं
  10. वाहह्हह.. सुंदर सकारात्मक सृजन मीना जी👍

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    उत्तर
    1. सराहना भरी प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभार श्वेता जी

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  11. अपने आप में स्थर रहना दृढ़ता से ये भी उसूल ही है सुंदर भाव रचना मीना जी।

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    उत्तर
    1. उत्साहित करते वचनों के लिए सस्नेह आभार कुसुम जी ।

      हटाएं
  12. रोने से नही कुछ भी हासिल ,
    मेरे सिद्धांत कुछ ऐसे ही है ।
    चल उठ संभल और बढ़ आगे ,
    निर्णय ये खुद मेरे ही है ।

    सुन्दर सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत बहुत आभार विकास जी ।

    जवाब देंहटाएं
  14. रोने से नही कुछ भी हासिल ,
    मेरे सिद्धांत कुछ ऐसे ही है ।
    चल उठ संभल और बढ़ आगे ,
    निर्णय ये खुद मेरे ही है ।

    पंक्तियाँ प्रेरित करती हुई बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई के लिए हृदयतल से आभार संजय जी ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"