कई बार हमें
सीमाओं का ज्ञान नही होता।
सीमाओं का ज्ञान नही होता।
अधिकार और कर्त्तव्य का
भान नही होता।।
भान नही होता।।
अधिकार तो चाहिए
क्योंकि जन्मसिद्ध हैं।
क्योंकि जन्मसिद्ध हैं।
मगर कर्त्तव्य क्यों नही?
वह भी तो स्वयंसिद्ध हैं।।
वह भी तो स्वयंसिद्ध हैं।।
दोनों एक डोर से बंधे हैं
साथ ही रहेंगे।
साथ ही रहेंगे।
यदि चाहिए इनमें से एक
तो बिखराव भी हम ही सहेंगे।।
तो बिखराव भी हम ही सहेंगे।।
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