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रविवार, 4 दिसंबर 2016

"सीख" (हाइकु)

जीवन पथ
घनघोर अँधेरा
चलता चल

ऊँचे पर्वत
निर्जन उपवन
चलता चल

कठिन लक्ष्य
श्रम तेरी मंजिल
चलता चल

शुभ्र चाँदनी
है तेरी प्रदर्शक
चलता चल

तेरी साधना
अरुणोदय वेला
चलता चल ।।


XXXXX

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (27-12-2020) को   "ले के आयेगा नव-वर्ष चैनो-अमन"  (चर्चा अंक-3928)    पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --   
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

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    उत्तर
    1. चर्चा मंच पर मेरे सृजन को मान देने के लिए सादर आभार सर 🙏

      हटाएं
  2. वाह!बहुत ही सुंदर हाइकु दी।
    सादर

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"