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मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

"अधूरी कविता"

एक अधूरी कविता,सोचा कल पूरी करुंगी
अधूरी इसलिए कि भाव और विचार
आए और चले गए , कल ही की तरह
कल का क्या ? आज के बाद
रोज ही आता है और रोज ही जाता है
कल कभी आया नही और
कविता पूरी हुई नही
मन की बातें…, पन्नों पर बेतरतीब सी
टेढ़ी-मेढ़ी विथियों की तरह
अक्सर मुँह चिढ़ाती हैं तो कभी
सम्पूर्णता हेतु अनुनय करती हैं
मगर क्या करुं….?
दिल आजकल दिमाग का काम करने लगा है
कोमलता की बातें भूल बस
समझ -बूझ की हठ करने लगा है .
×××××

2 टिप्‍पणियां:

  1. उम्मीद पर दुनिया कायम है...मिलेगा ...ज़रूर मिलेगा अधूरी कविता जरूर पूरी होगी

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  2. संजय जी टंकण त्रुटि के कारण आपका नाम गलत लिखा गया इसके लिए क्षमा‎प्रार्थी हूँ .हौसला अफजाई के लिए हृदयतल से धन्यवाद आप का.

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"