Followers

Copyright

Copyright © 2019 "मंथन"(https://shubhrvastravita.blogspot.in/) .All rights reserved.

शुक्रवार, 16 दिसंबर 2016

“यकीन”

यकीन तो बहुत है
तुम पर ..
सतरंगी सपनों का
मखमली अहसास
और
सुर्ख रंगों की शोखियाँ ;
मैने बड़े जतन से
इकट्ठा कर...,
तुम्हारे अंक में पूर दिए हैं
तुम्हारा अंक मेरे लिए
तिजोरी जैसा …,
जब मन किया
खोल लिया और
जो जी चाहा खर्च किया
खर्चने और सहेजने का ख्याल ,
ना मैंने रखा और ना तुमने
जिन्दगी बड़ी छोटी है
अनमोल समझना चाहिए
इसे घूंट-घूंट पीना
और क़तरा क़तरा
जीना चाहिए

XXXXX

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!
    बहुत बहुत सुंदर मीना जी! आप सदा छोटे में इतने गहरे भाव भरते हो लगता है भाव सीधे अंतर से निकल अंतर तक उतरते हैं।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका उत्साहवर्धन सदैव रचना को प्रवाह देने के साथ मुझे ऊर्जात्मक बनाता है कुसुम जी । आपका स्नेह यूं ही बना रहे । सस्नेह नमस्कार🙏

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"