Copyright

Copyright © 2024 "मंथन"(https://www.shubhrvastravita.com) .All rights reserved.

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

“अवधपुरी” (हाइकु)

अवध जन
देख दुल्हा-दुल्हिन
मुदित मन

हर्षित नृप
रघुकुल नन्दन
राजतिलक

रानी के वर
भये भूप विकल
मूर्छित तन

निर्मल मन
सीय राम लखन
वन गमन

बिन राघव
भई दिशाविहीन
अवधपुरी


XXXXX

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

- "मीना भारद्वाज"