सूखी रेत के
ढूह पर…,
तुम्हारा मन है कि
तुम बनाओ
एक घरौंदा
तो बनाओ ना…,
रोका किसने है
छागल में अभी भी
बाकी है
पानी की बूँदें,
एक घरौंदे की
गीली रेत जितनी
आज...
समय और फुर्सत से
कर लो अपना
ख़्वाब पूरा
तुझमें - मुझमें
बाकी है अभी
इतना हौसला कि
पहुँच जाएंगे कुएँ के पास
या फिर …,
खोद लेंगे एक कुँआ
अपनी छोटी सी
प्यास की खातिर
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【चित्र : गूगल से साभार】