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बुधवार, 7 जून 2017

“मन (2)”

खामोशियों में डूबा मन ।
गहराईयों की बात करता है ।।  
               
तय नही करता दो कदम की दूरी ।
क्षितिज तक जाने की बात करता है ।।

जिद्दी है , एक सुने ना मेरी ।
अपनी ही धुन में मगन चलता है ।।

समझे ना जमीनी हकीकत ।
किताबों की दुनिया की बात करता है ।।

दुष्कर है जीना खुद  के लिए ।
औरों पे मरने की बात करता है ।।

XXXXX

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- "मीना भारद्वाज"