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सोमवार, 26 जून 2017

“वर्ण पिरामिड”

(1)

हे !
कान्हा
ब्रज के
प्राणाधार
नन्द यशोदा
राह  निहारत
सूना यमुना तट
व्यथित राधिका रानी
कब आओगे गिरधारी
सुनियो अर्ज बांके बिहारी!

(2)

मैं
और
सवेरा
सुनहली
रवि किरणें
दिवस आरम्भ
नई अभिलाषाएँ
आलोकित तन मन
खग दल  का कलरव
मुदित धरा का कण-कण।

XXXXX

2 टिप्‍पणियां:


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"