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शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

"परामर्श" (सेदोका)

(1)            

तुम ही कहो
ये भी कोई बात है
अपना ही अपना
गौरवगान
समझदारी नहीं
दर्प का पर्याय है

   (2)

बुरी बात है
किसी की ना सुनना
मनमानी करना
जिद्द होती है
यदि जाना है आगे
सब के साथ चलो

     (3)

भोर का तारा
कर रहा इशारा
दिन की शुरुआत
ऊषा के साथ
कल को भूल कर
आज की नींव रख

       XXXXX

22 टिप्‍पणियां:

  1. भोर का तारा
    कर रहा इशारा
    दिन की शुरुआत
    ऊषा के साथ
    कल को भूल कर
    आज की नींव रख.... बहुत सुंदर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहनीय प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन हेतु अति आभार 🙏

      हटाएं
  2. यदि जाना है आगे
    सब के साथ चलो
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति के साथ ही एक सशक्त सन्देश भी है इस रचना में।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी प्रतिक्रियाएं सदैव उत्साहवर्धित करती हैं संजय जी ।

      हटाएं
  3. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 02 सितम्बर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका बहुत बहुत आभार मेरे सृजन को "पाँँच लिंकों का आनन्द मेंं" शामिल कर मान देने के लिए । आप से जुड़ना मेरे लिए सदैव हर्ष का विषय होता है ।

      हटाएं
  4. आशा का संचार करती सुंदर रचना, मीना दी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हौसला अफजाई के लिए आपका बहुत बहुत आभार ज्योति ।

      हटाएं
  5. अरे वाह्हह... बहुत सुंदर सेदोका लिखा है आपने मीना जी। आपकी विविधता पूर्ण विधाओं में लिखी रचनाएँ सदैव प्रभावित करती है। आपकी प्रतिभाशाली लेखनी के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं स्वीकार करें।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत बहुत आभार श्वेता जी :-)

    जवाब देंहटाएं
  7. यदि जाना है आगे
    सब के साथ चलो
    शिक्षाप्रद रचनाएं

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपका स्वागत पथिक जी ब्लॉग पर, सृजन की सराहना हेतु अति आभार ।

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  8. सुविचार से परामर्श सेदोका मीना जी।
    बहुत ही सुंदर।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहनीय प्रतिक्रिया हेतु बहुत बहुत धन्यवाद कुसुम जी ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"